Tuesday, February 16, 2016

"CHANAKYA NITI"

“ चाणक्य नीति 


·   अगर सांप जहरीला ना भी हो तो भी उसे खुद को जहरीला दिखाना चाहिए।

व्यक्ति अकेले पैदा होता है और अकेले मर जाता है; और वो अपने अच्छे और बुरे कर्मों का फल खुद ही भुगतता है; और वह अकेले ही नर्क या स्वर्ग जाता है|

·   इस बात को व्यक्त मत होने दीजिए कि आपने क्या करने के लिए सोचा है, बुध्दिमानी से इसे रहस्य बनाएं रखें और उस काम को करने के लिए दृढ़ रहें।

·   शिक्षा सबसे अच्छी मित्र है। एक शिक्षित व्यक्ति हर जगह सम्मान पाता है। शिक्षा सौंदर्य और यौवन को परास्त कर देती है।

·   जैसे ही भय आपके करीब आए, उस पर आक्रमण कर उसे नष्ट कर दें।

·   किसी मूर्ख व्यक्ति के लिए किताबें उतनी ही उपयोगी हैं, जितना कि एक अंधे व्यक्ति के लिए आइना।

·    जब तक आपका शरीर स्वस्थ और नियंत्रण में हैं और मृत्यु दूर हैं, अपनी आत्मा को बचाने कि कोशिश करें, जब मृत्यु सिर पर आएगी तब आप क्या कर पाएंगे?

·   कोई भी व्यक्ति अपने कार्यों से महान होता हैं, अपने जन्म से नहीं।

·   जिस प्रकार सूखे पेड को अगर आग लगा दी जाए तो वह पूरा जंगल जला देता है, उसी प्रकार एक पापी  पुत्र पूरे परिवार को बर्बाद कर देता हैं।

·   दुनिया की सबसे बडी‌ शक्ति नौजवानी और औरत की सुंदरता हैं।

·   पहले पांच सालों में अपने बच्चे को बड़े प्यार से रखें। अगले पांच साल उन्हें डांट-डपट के रखें। जब वह सोलह साल का हो जाए तो उसके साथ एक मित्र की तरह व्यवहार करें। आपके वयस्क बच्चे ही आपके सबसे अच्छे मित्र हैं।

·   सबसे बड़ा गुरु मंत्र हैं: कभी भी अपने राज दूसरों को मत बताएं। ये आपको बर्बाद कर देगा।

·   फूलों की सुगंध केवल वायु की दिशा में फैलती हैं. लेकिन एक व्यक्ती की अच्छाई हर दिशा में फैलती हैं।

·    हमें भूत के बारे में पछतावा नहीं करना चाहिए, ना ही भविष्य के बारे में चिंतित होना चाहिए; विवेकवान व्यक्ति हमेशा वर्तमान में जीते हैं।

·    हर मित्रता के पीछे कोई ना कोई स्वार्थ होता है। ऐसी कोई मित्रता नहीं जिसमें स्वार्थ ना हो। यह कडवा सच हैं।

·   सांप के फन, मक्खी के मुख और बिच्छु के डंक में जहर होता हैं; पर दुष्ट व्यक्ति तो सिर से पैर तक इसमें भरा होता है।

·    वह जो हमारे चिंतन में रहता है वह करीब है, भले ही वास्तविकता में वह बहुत दूर ही क्यों ना हो; लेकिन जो हमारे हृदय में नहीं है वो करीब होते हुए भी बहुत दूर होता हैं।

·    वह जो अपने परिवार से अत्यधिक जुड़ा हुआ हैं, उसे भय और चिंता का सामना करना पड़ता हैं, क्योंकि सभी दुखों की जड़ लगाव हैं।

·    जब आप किसी काम की शुरुवात करें, तो असफलता से नहीं डरें और उस काम को ना छोंड़े। जो लोग ईमानदारी से काम करते हैं वो सबसे प्रसन्न होते हैं।

·    सेवक को तब परखें जब तक वह काम ना कर रहा हो, रिश्तेदार को किसी कठिनाई में, मित्र को संकट में और पत्नी को घोर विपत्ति में। इसलिए खुश रहने के लिए लगाव छोड़ देना चाहिए।  

·   कोई भी काम शुरु करने से पहले खुद से तीन सवाल जरुर पूछें; मैं ऐसा क्यों करने जा रहा हूँ? इसका क्या परिणाम होगा? क्या मैं सफल रहूँगा?

·    एक उत्कृष्ट बात जो शेर से सीखी जा सकती हैं वो ये हैं कि व्यक्ति जो कुछ भी करना चाहता है उसे पूरे दिल और जोरदार प्रयास के साथ ही करें।

·    संतुलित दिमाग जैसी कोई सादगी नहीं हैं, संतोष जैसा कोइ सुख नहीं हैं, लोभ जैसी कोइ बीमारी नहीं हैं और दया जैसा कोई पुण्य नहीं हैं।

·    यदि किसी का स्वभाव अच्छा है तो उसे किसी और गुण की क्या जरुरत हैं? यदि आदमी के पास प्रसिध्दि है तो भला उसे किसी श्रुंगार की क्या आवश्यकता हैं|

·    अपमानित हो कर जीने से अच्छा मरना हैं। मृत्यु तो बस एक क्षण का दु:ख देती है, लेकिन अपमान हर दिन जीवन में दु:ख़ लाता हैं।

·    कभी भी उनसे मित्रता नहीं करें, जो आपसे कम या ज्यादा प्रतिष्ठा का हों। ऐसी मित्रता कभी आपको खुशी नहीं देगी।

·    अपना धन उन्हीं को दो जो उसके योग्य हों और किसी को नहीं। बादलों के द्वारा लिया गया समुद्रका जल हमेशा मीठा होता हैं।

·    जो लोग परमात्मा तक पहुंचना चाहते हैं उन्हें वाणी, मन, इंद्रियों की पवित्रता और एक दयालु हृदय की आवश्यकता होती हैं।

आशा करता हूँ कि आपको आचार्य चाणक्य के इन नीतियों से कुछ सींख जरुर मिलें और आपको ये लेख पसंद आया हो।

आलेख पढ कर टिप्पणी करना ना भुलें। और अपने दोस्तों के साथ भी share जरुर करें।


धन्यवाद।




7 comments:

ब्लॉग बुलेटिन said...

ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, " जनहित मे प्रेमपत्र का पुनर्चक्रण - ब्लॉग बुलेटिन " , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

Amrita Tanmay said...

मनन योग्य ।

Atul Raje Jadhav said...

धन्यवाद अम्रिताजी।

Santosh Sen said...

बहुत ही बडिया जादव जी

Santosh Sen said...

बहुत ही बडिया जादव जी

कल्पना रामानी said...

सुंदर विचार

Pushpendra Dwivedi said...

वाह बहुत बढ़िया मोटिवेशनल पोस्ट