Tuesday, September 29, 2015

~ सबसे बुरा रोग, क्या कहेंगे लोग? ~

सबसे बुरा रोगक्या कहेंगे लोग?


कइ बार हमारे मन मे ऐसे सवाल आते है किदुनिया मे बाकी के लोग कैसे सफल होते हैकैसे जल्दी जल्दी आगे बढते हैंऔर एक हम है जहाँ है वही अटके हुये है। ऐसा क्यो होता हैइस सवाल का जवाब ढुंडेंगे तोनसीबबाकी लोगपरिस्थिती और खुद को दोषी पायेंगे या दोष देंगे। लेकिन किसी और को या खुद को दोष देकर हमारे सवालो के जवाब नही मिलने वाले ना ही हम सफल होंगे। अगर हमे इस सवाल का जवाब ढुंडना है और बाकी लोगो कि तरह सफल होना है तो हमे खुद की गलतियो को खुले दिल से स्वीकार करके उन्हे सुधारने की हिम्मत करनी होगी। प्रयास करना होगा। और ये हमे हमेशा करते रहना होगा। ये सब बोलने के लिये आसान हैपरंतु हमारी कोइ गलती है ये हमे स्वीकार ही नही होता। बहोत मुश्किल लगता है अपनी गलती स्विकार करके उसपर काम करना। अगर आपको आपकी गलतिया स्वीकार करना  गया तो आपको उन पर काम करना आसान हो जायेगा। आइये उन गलतियो के बारे मे जानते हैं।

१.      अगर हम नही कर पायें तो?

ये हमारे मन का सबसे पहला संदेह (डर) है। कुछ भी मन मे आये वो बिंधास बेझिझक करने की बजाय हम उस बात पर ज्यादा समय सोचने मे बिता देते हैं। असफल होने का डरलोग क्य कहेंगे इस बात का डरफिर ये जोखिम लेने का डरये सब बातें सोच के आपकी ये धारणा पक्की हो जाती है कि शायद मै ये नही कर सकता। सच कहो तो आप खुद की प्रतिभाकौशल इन पर अन्याय करके मिला हुआ मौका नकारते हैं। हमारी उन्नती नही होती क्योंकि हम नया कुछ करनेसे कतरातें हैं। डरतें हैं। हमेशा डरते है कि लोग क्या कहेंगेऐसे वक़्त ट्रक पर लिखा हुआ विचार याद करें“सबसे बुरा रोगक्या कहेंगे लोग? और आगे बढिये। अपने कान बंद कर लिजिये और आपको जो पसंद है वो किजिये आप जरुर सफल होंगे।

२.      संदेह करना।

हम अपने आप पर संदेह करते हैं! ये हमारी दुसरी गलती हैं। क्यो?, कैसे?, कहा?, कबपता नही परंतू अपने अंदर से कोइ आवाज आती है कि नही तुमसे नही हो पायेगातुम नही कर पाओगे। वो आवाज कहती हैंइस झमेलें मे मत पडों कुछ हासिल नही होगाजो चल रहा है सही हैं। बस और क्या हम इस आवाज से डर जाते हैं। हार मान लेते हैं। और यही हमारा कुछ नया करने का आत्मविश्वास खत्म होता जाता हैं। इसीलिये दोस्तो खुद पर और अपनी काबिलियत पर संदेह करना अभी बंद करो और काम पर लग जाओ। सफलता अगले कदम पर आपका इंतजार कर रही हैं।
  


३.      गलत और बेकार आदतें।

हम देखते है कि बहोत से सफल लोगो को अछ्छी आदतें होती हैं परंतु हम कभी इन आदतों को स्वीकार करके उनको अपने जीवन मे स्थान नही देते। अछ्छी आदतें सफलता का आधार हैं। हम किसी की गलत आदते जितनी स्वीकार करते है उतनी अछ्छी आदते नही स्विकार करते। और अछ्छी आदते अपने आप नही लग जाती हमे उन्हे जबरन डालना पडता हैं। दुनिया के सफल लोगों की आदते देखेंउन लोगो ने कैसे निरंतर अछ्छी आदते स्विकार कर उनका पालन किया इस का अवलोकन करें। इस से आप को उन का महत्व समझ आयेगा। मैंने सुना है कि सचिन तेंदुलकर ने रिटायर्ड होने तक कभी भी पेट प्रॅक्टिस या नेट प्रॅक्टिस के लिये देर नही की या कभी मिस नही की। ऐसा संयमऐसी स्वयंशिस्त है आपके पासएक बार खुद से जरुर् पुछिये।

४.      प्रेरणाये कौन देगा?

बहोत बार लोग कहते है की युवा पिढी के सामने कोइ आदर्श नहीप्रेरणा देने लायक ऐसा कुछ नही। मै कहता हु कि बाकी लोग क्यो दे किसी को प्रेरणाजो लोग सफल है वो खुद ही खुद को प्रेरित करते हैं। जब वे निराश होते हैटुट जाते है तब खुद  खुद बाहर  जाते हैं। खुद ही अपने आप को हिम्मत देते हैं। किसी ने बाहर से आपको प्रेरणा के डोस देने कि बजाय स्वयं ही अपने आप को प्रेरणा देते रहनानिराश होने पर हिम्मत से निराशा से बाहर आनाछोटी सफलता के लिये खुद को शाब्बासी देकर आगे बढना ये एक कौशल हैंइसे सिखना होगा। खुद ही खुद की प्रेरणा बनना होगा!

५.      बहाने बताना।

हम हमेशा कुछ  कुछ बहाने बनाते रेहते है। ऐसा हुआ इसलिये मै ये नही कर पायावैसा हुआ इसलिये मै वो नही कर पाया। हम अगर ऐसेही बहाने बनाते रहेंगे तो हमें सफलता कैसे मिलेगीजो लोग कमजोर होते हैजल्दी हार मान लेते है ऐसे लोग ही बहाने बनाते हैं। इस से अछ्छा हम जो भी काम होकोइ भी परिस्थिती हो उसे चुनौती मान कर उसका सामना करें और उसे पुरा करें इसमें ही महानता हैं। खुद की गलतीया स्विकार करनेकी हिम्मत भी होनी चहिये। और ऐसे करनेवालें ही लोग सफल होते हैं। इसिलिये सफलता का मार्ग है बहाने बताना बंद करें। जो नही कर पाये वो मेरी वजह से नही कर पाये ऐसा स्वीकार करें और आगे बढें।

६.      अतीत का भूत।

हमारे अतीत का हमारे दिल पर हमेशा एक बोज रहता है। सफलता और असफलता दोनो का। अतीत मे हमने जो भी कमाया वो हमारा पिछा नही छोडता। सफलता को खोने का डर हमेशा लगा रहता है। और अतीत मे हमे जो भी तकलिफ हुयी हैजो भी परेशानिया झेलनी पडीजो अछ्छे और् बुरे अनुभव आये वो सब हमारे पैरो की बेडिया बनता है और हमे आगे बढने से रोकती है। इसलीये इस भूत को भगाइये। जो हो गया सो हो गया। उसे भुल कर आगे बढिये। आनेवाला कल हमारी राह देख रहा है ये सोच कर आगे बढिये। और आज अभी जो है उसे स्वीकार कर वर्तमान मे लक्ष्य केन्द्रित किजिये।



आप सबको सफल जीवन के लिये शुभ कामनायें। लेख पढ कर आपकी राय (कमेंट) जरुर करें।


धन्यवाद।


9 comments:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल बुधवार (30-09-2015) को "हिंदी में लिखना हुआ आसान" (चर्चा अंक-2114) (चर्चा अंक-2109) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Atul Raje Jadhav said...

बहोत बहोत धन्यवाद सर!!!

Digamber Naswa said...

रोग तो सारे ही बुरे हैं ... सभी से एक एक कर के पार आना आना चाहिए ...

रचना दीक्षित said...

सफल जीवन के सच्चे मन्त्र बताएं हैं इस आलेख में.

Atul Raje Jadhav said...

धन्यवाद सर और मॅम।

Kavita Rawat said...

पहले ही सावधानी बरती जाय तो रोग लगने की संभावना कम रहती है...बहुत बढ़िया ..

Atul Raje Jadhav said...

सही कहा कवितजी,परंतु हमारे आसपास का वातावरण ही हमे इस परिस्थिती मे डालता है।
बहोत धन्यवाद्।

रश्मि शर्मा said...

बि‍ल्‍कुल सही बात..

Atul Raje Jadhav said...

धन्यवाद रश्मिजी।